Author- Manoj Kumar Abhimanyu
मित्रों, कुछ समय पहले तक टीवी में अक्सर 'भारत निर्माण' का विज्ञापन आता था। यह विज्ञापन देख कर मेरे अंतर्मन में दुःख, निराशा और गुस्से के भाव पैदा होते थे। इसी तरह की भावना सारे देश भक्तों के अंदर आती होगी, ऐसा मेरा मानना है। आज़ादी के लगभग सात दशकों के उपरांत भी हमारे देश ने वह प्रगति नहीं कि है जो दूसरे देश, जिन्हे हमारे बाद आज़ादी मिली, उन देशों ने करके दिखाया है। आज भी हम आज़ादी के वक़्त जिन प्रश्नो का जवाब तलाश कर रहे थे, उन्हीं का जवाब ढूंढने में लगे हैं। शिक्षा, बिजली, पानी, सड़क, भूख, गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी, रहने को घर,रूढ़िवादिता, टुकड़ो टुकड़ो में बटा हमारा समाज, लाल फीताशाही, भाई भतीजावाद, भ्रस्टाचार, बेईमानी, बेलगाम बढ़ती जनसंख्या और महंगाई जैसे न जाने कितने सवाल अभी भी हमारे सामने मुँह बाये खड़े हैं। यह कैसी बिडम्बना है कि युएनओ के सर्वे के आधार पर विश्व के समस्त देशों के बीच हमारा देश मानव विकास इंडेक्स में आखिरी पायदान के कुछ देशों के साथ खड़ा है। हमारे देश कि बागडोर जिन हाथों में कई दशकों तक रही, उन नेताओं ने बेईमान पूंजीपतियों और अपराधी तत्वों के साथ सांठ गाठ करके देश के विकास और जनता कि भलाई से ज्यादा खुद कि सम्पदा बढ़ाने पर इतना ज्यादा ध्यान दिया कि गरीबी और अमीरी के बीच कि खाई बढ़ती चली गयी। यही नहीं देश में फूट 'डालो और राज करो' के अंग्रेज़ों के सिद्धांत पर चलते हुए इन लोगों ने समाज को इस तरह विभाजित किया कि आज लोगों के बीच भाईचारे, प्रेम और विश्वास कि भारी कमी है। जनता को इस तरह बाँट कर इन नेताओ ने उन्हें निरंतर वोट बैंक कि तरह इस्तेमाल किया है। हर चुनावी वादे में गरीबी, अशिक्षा और बेरोजगारी को दूर करने के वादे किये जाते हैं और जीत जाने पर सारे मुद्दे गौण हो जाते हैं।
ऐसे नेताओं को ठीक करने का मेरा एक सुझाव है कि जिस प्रकार फिल्मों कि रेटिंग होती है, या टीवी पर आने वाले प्रोग्राम्स की रेटिंग होती है जिसे टी आर पी भी कहते हैं, जो इन फिल्मों या सीरियलों कि गुणात्मकता को प्रदर्शित करता है, क्यूँ न हम ऐसी ही रेटिंग अपने नेताओं की भी करें। उनके पूर्व कार्य काल में किये अच्छे या बुरे कार्यों तथा उनकी बाकी योग्यताओं के आधार पर उनको -१० से +१० के बीच पॉइंट्स दिए जाएँ। और इस कार्य को करने के लिए विश्वशनीय रेटिंग एजेंसीयों को प्रयोग किया जाए।
मित्रों, मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आपको मेरा लेखन अच्छा लगेगा। कृपया अपना आशीर्वाद और लाइक्स मुझे इसी तरह देते रहिये ताकि मेरा हौसला बुलंद रहे और मैं नित प्रति दिन अपने पाठकों के लिए लिखता रहूँ। आप सबों को मेरे पोस्ट्स पसंद करने के लिए फिर से बहुत बहुत धन्यवाद।
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मित्रों यदि मेरा यह पोस्ट आपके दिल को जरा भी छू कर गुजरा हो तो मुझे विश्वास है कि आप मेरे इस प्रयास को लाइक दे कर मुझे और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा, स्नेह और आशीर्वाद देंगे। आप अगर मुझे मेरे फेसबुक प्रोफाइल पर फॉलो करते हैं तो आपको मेरे शेयर किये सारे पोस्ट्स आपके नोटिफिकेशन्स में मिलते रहेंगे।
ऐसे नेताओं को ठीक करने का मेरा एक सुझाव है कि जिस प्रकार फिल्मों कि रेटिंग होती है, या टीवी पर आने वाले प्रोग्राम्स की रेटिंग होती है जिसे टी आर पी भी कहते हैं, जो इन फिल्मों या सीरियलों कि गुणात्मकता को प्रदर्शित करता है, क्यूँ न हम ऐसी ही रेटिंग अपने नेताओं की भी करें। उनके पूर्व कार्य काल में किये अच्छे या बुरे कार्यों तथा उनकी बाकी योग्यताओं के आधार पर उनको -१० से +१० के बीच पॉइंट्स दिए जाएँ। और इस कार्य को करने के लिए विश्वशनीय रेटिंग एजेंसीयों को प्रयोग किया जाए।
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