Saturday, January 4, 2014

एक और निर्भया - दिल दहला देने वाली एक और घटना जो हमारे समाज के ऊपर एक और तमाचा है!

Author- Manoj Kumar Abhimanyu

पिछले एक हफ्ते से मेरी आत्मा बार बार मेरे सर्वस्व को झकजोर रही है।  समझ नहीं आ रहा क्या करूं !  आप सबको तो दिल्ली में हुआ निर्भया रेप काण्ड तो याद ही होगा।  याद भी क्यूँ न हो, आखिर पुरे देश में इसको ले कर आंदोलन हुआ था।   मीडिया ने इस समाचार को हाथो हाथ लिया था।  ऐसा लगा था मानो जनता के जागरूक होने से सरकार और कानून व्यवस्था कायम रखने वाली सारी एजेंसियां पूरी तरह जागृत हो गयी हैं।   और इस जागृति के बाद शायद इस तरह कि घटनाओ पर लगाम लगेगा।   मगर हकीकत कुछ और ही बयां करती है।   अभी भी रेप के घटनाएं बदस्तूर जारी हैं।  आये दिन अखबारो में पढता हूँ कि बड़े बड़े शहरों एवं महानगरों में बुजुर्ग महिलाओ से ले कर अबोध मासूम बच्चियों तक पर रेप हो रहे हैं।  हद तो यह हो गयी है कि रेप करने के बाद भी अपराधी न केवल बेख़ौफ़ घूमते हैं, बल्कि उन रेप कि शिकार महिलाओ, बच्चियों एवं उनके परिवार वालों का कत्ल करने कि धमकी से ले कर कभी कभी तो उनका दुबारा या नियमित तौर से रेप करने से भी नहीं चूकते।   और हमारा वही सभ्य समाज जो निर्भया के लिए अचानक जागृत हो कर सड़को पर कैंडल मार्च से ले कर सरकार एवं पुलिस के निकम्मेपन को ले कर अत्यंत आंदोलित हो गया था, वो आज फिर से अपनी पुरानी कुम्भकर्णी नींद के आगोश में वापस चला गया मालूम होता है।

जी हाँ मात्र सोलह साल कि लड़की, जिसके टैक्सी चालक पिता जो कि कोलकाता में पिछले करीब २५ वर्ष से वहाँ कि सड़को पर टैक्सी चला कर अपनी और अपने परिवार के सदस्यो का भरण पोषण करते आये हैं, को दरिंदो ने न केवल एक बार गैंग रेप किया बल्कि लड़की के द्वारा अपने पिता को यह बात बताने पर जब वो पुलिस के पास पहुचे तो पुलिस वालों ने केस रजिस्टर करने से भी इंकार कर दिया।  और यह बात जब उन दरिंदो को पता चली कि वह लड़की पुलिस के पास केस दर्ज कराने गयी थी, तो उन दरिंदो ने उसके साथ दुबारा रेप किया और जान से मारने कि धमकी भी दी। आये दिन डर और आतंक के माहौल ने हालत यह कर दी कि उसके पिता को अपना पुराना महल्ला छोड़ कर दूसरी जगह किराये पे कमरा लेना पड़ा।  ऐसी दरिंदगी को वह कम उम्र लड़की सहन न कर सकी और जब उसे यह मालूम हुआ कि वो गर्भवती हो गयी है तो उसने अपनी जीवन लीला खत्म करने के लिए अपने ऊपर केरोसिन डाल कर आत्मा हत्या करने कि कोशिश की जिसमे वह आग से बहुत बुरी तरह झुलस गयी।   करीब एक हफ्ते अस्पताल के बेड  पर ज़िन्दगी और मौत के बीच झूलने के बाद उसने दम तोड़ दिया।   उस छोटी सी बच्ची को क्या मालूम था कि पिछले १५ - १६ सालो तक अपने पैतृक गाँव जो कि बिहार में स्थित है वहाँ रह कर पढ़ने लिखने के बाद जब उसके पिता उसे व उसकी माँ को कोलकाता ले कर आयेंगे ताकि उसकी परवरिश कोलकाता में बेहतर हो सके, उसकी शिक्षा बेहतर स्कूल में हो सके, तब उसके कोलकाता आने के कुछ दिनों के अंदर ही उसके साथ ऐसी दरिंदगी होगी।  आज उस पिता पर क्या गुजरती होगी, मैं तो यह सोच सोच कर पागल हो रहा हुँ।  मगर यहाँ कि सरकार को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा।  सरकार का कोई नुमाइंदा उनके हाल चाल पूछने को नहीं गया, ना किसी ने कोई सान्तवना दी।  हालत तो यह थी कि जब उसके परिवार वाले मुख्य मंत्री से मिलने गए तो उन्हें वहा से भगा दिया गया।   दर्द और आतंक के साये में जी रही उस लड़की ने तो अपनी जान देकर उस नारकीय जीवन से मुक्ति पा ली।  अभी उसके पिता पर धमकियों का दौर जारी है और उन पर दवाब बनाया जा रहा है कि वो अपनी बेटी का केस वापिस ले कर कोलकाता छोड़ कर वापिस बिहार चले जाएँ।  क्या हमारा दिल इतना पत्थर दिल हो गया है कि इस बात से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर नहीं तो रोज यह खबर अखबारो में आती है, वो आंदोलन का दिया जो निर्भया से शुरू हुआ था क्या वो आवाज़ हर ऐसी दरिन्दिगी के खिलाफ, समाज के इन बेखौफ घूमते अपराधियो के खिलाफ और पुलिस और सत्ता में बैठे भ्रष्ट लोगो के खिलाफ जो ऐसे अपराधियो के साथ सांठ गाँठ करके बैठे हैं, उनके खिलाफ फिर से नहीं जलेगा?  मैंने आप सबको जगाने का प्रयास किया है, मैं देखना चाहता हूँ कि मेरे मित्रो में से कितने आज इस बात पर मेरे साथ एक मत हैं?  कितनो कि आत्मा ऐसी दरिंदगी पर उनको झकझोरती है ?

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