Sunday, January 5, 2014

तेरी आँखों में बसा एक सपना हूँ मैं


Written by- Manoj Kumar Abhimanyu

तेरी आँखों में बसा एक सपना हूँ मैं
ढूंढती नज़र तेरी यहाँ वहाँ जैसे तुझसे तनहा हूँ मैं।

करीब आती हो जब कभी मुझे पहचानती नहीं
सूरत मेरी शायद तुझे कभी रास आती नहीं।

एक बार दिल के झरोखे से पहचान मेरी हकीकत को
सूरत ही नहीं ज़ालिम देख मेरी सिरत को।

दूर जाती मुझसे दिल को अक्सर ठोकरें दिए जाती हो।
क्यूँ इतना तन्हाइयों में खुद को तड़पाये जाती हो।
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