आज एक और कत्ल, क्षमा चाहूंगा दरअसल वो आत्महत्या थी जिसे मैं कत्ल कह कर सम्बोधित कर रहा हूँ। जी हाँ, आज फिर किसी ने मेट्रो रेल के नीचे आकर अपनी जान दे दी। खामियाजा दफ्तर जाने वाले हज़ारो कर्मचारियों को भुगतना पड़ा जो दफ्तर समय से नहीं पहुंच सके क्यूंकि कत्ल का वक़्त सुबह के ९ से १० के बीच का था जो दफ्तर जाने वालों का पीक ऑवर हुआ करता है। खैर यह जान कर शायद ही किसी का दिल द्रवित हुआ हो। हां इसके विपरीत न जाने कितने लोगों ने उसकी इस कदम को उनकी खुद की असहजता की वजह से मन भर कोसा होगा। मैंने कई लोगों को मजाक के तौर पर और कईओं को गुस्से में यह कहते सुना की उसे आत्महत्या का वही वक़्त चुनना था। मित्रों, आज मैं भी उसी असहजता का शिकार हुआ क्यूंकि मैं भी उन हज़ारों लोगों का हिस्सा हु जो रोज उस समय दफ्तर के लिए मेट्रो रेल की सेवा का लाभ उठाते हैं। आज मेट्रो के परिचालन के बाधित होने के वजह से मुझे बस के धक्के खा कर दफ्तर पहुचना पड़ा। मित्रों थोड़ा उन लोगों के बारे में सोच कर देखते हैं - ऐसी क्या परिस्थतियाँ होती होंगी जिनके कारण अच्छे खासे युवा पीढ़ी के लोग ज्यादातर आत्महत्या के दलहीज तक पहुंच जाते हैं? कही हम सब इस सभ्य समाज के हिस्सा होने के नाते दोषी तो नहीं ? क्या हमारा कही फ़र्ज़ नहीं था कि हम ऐसे लोगों को इस हद तक पहुचने के पहले रोक सकें। हम कहेंगे, हमारा उनसे क्या वास्ता? हम तो उन्हें जानते तक नहीं। मित्रों हो सकता है यह सही हो हज़ारों की भीड़ में शायद कोई एक दो व्यक्ति ही उसे जानता हो। मगर यह बीमारी बहुत पुरानी हो चुकी है और हर हफ्ते दो हफ्ते में आत्महत्या की ऐसी घटनाओं से हम रब-रु होते आये हैं। वो जिसने आत्महत्या की है वह किसी का मित्र, किसी का सम्बन्धी, किसी का सहकर्मी या सहपाठी था। हां मित्रो, वह काफी तनहा हो गया था। जब उसे ऐसा महसूस हुआ कि उसको समझने वाला, उसको प्यार देने वाला, उससे बातें करने वाला, उसकी समस्याओ से उसे निकालने वाला अब कोई नहीं रहा , तभी उसने ऐसा सोचा कि अब बस अब अपने इस बेइंतहा कष्ट से मुक्ति का एक ही तरीका है - आत्महत्या। गौर से सोचिये इस बात पर। अपने मित्रों में, सहपाठियों, सहकर्मियों, सगे -सम्बन्धियों में किसी को अकेला मत छोड़िये। अगर आपको ऐसा लगे कि वो अलग थलग पड़ता जा रहा है, उससे मिलते रहिये, उसकी बातों को सुनिए, उसे प्रेरणा दीजिये, उसकी नकारात्मकता को पहचान उसे सही रास्ता दिखाइए। ऐसे लोग भटक रहे हैं, आपका जरा सा साथ, आपके थोड़े से मीठे बोल उसकी बहुमूल्य जिंदगी बचा सकते हैं। गौर कीजियेगा मेरी बातों पर।
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