Sunday, February 21, 2016

और कितने टुकड़ों में बांटोगे देश को !


हमारी भारत माँ के मुकुट कश्मीर की उन ऊँची चोटियों को कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी कब्जे में आने के बाद हमारे देश के जवानो ने ख़ुशी ख़ुशी मौत को गले लगा लिया मगर वापस उन चोटियों पर हमारा तिरंगा लहराया। कितनी आसानी से ये जे एन यू एवं जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्र खुल कर कश्मीर की आजादी की मांग करते हुए सैयद गिलानी और अफज़ल गुरु का गुणगान कर रहे हैं। क्या चाहते हैं ये, अपने ही देश के टुकड़े? कितने टुकड़े होंगे देश के अगर शुरुआत हुई तो? क्या पता भी है इन्हे? एक कश्मीर आजाद करोगे तो फिर पंजाब, नार्थ ईस्ट के राज्य, गोरखालैंड, तमिलनाडु और न जाने कितने राज्य। कल को जिसे केंद्र के अधीन रहने का मन न होगा वही आजादी माँगने बैठ जाएगा। अरे आज़ादी की मांग करने वालो मूर्खो, यह देश तभी तक सुरक्षित है आबाद है जब तक यह एक है। अगर कही टुकड़ो में बटा, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, केरला सबकी अपनी अपनी सेना की टुकड़ियां होंगी। सीमा विवाद के चक्कर में सब लड़ते रहेंगे। आज जहाँ लड़ाइयां हिमालय की तराई में लड़ी जाती हैं। कल हमारे घर, दूकान, ऑफिस सब गोला बारूद के शिकार होंगे। और यह वही चाहत है जो पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन बरसों से इंतज़ार में बैठे हैं। तुम उनका साथ दे रहे हो, भाई वाह ! चंद रुपयों के लालच में देशद्रोही ताकतों के हाथो बिक कर ये कैसा पाप कर रहे हो तुम, जरा देखो अपने सैनिको को जो हसते हँसते देश की सुरक्षा में कुर्बान हो जाते हैं ताकि हमारा देश अंखंड रहे और तुम कितनी आसानी से कहते हो.. "कश्मीर मांगे आजादी, हम छीन के लेंगे आज़ादी। भारत की बर्बादी तक जंग जारी रहेगी।" तुम्हे यही बर्बादी चाहिए। तुम कहाँ जाओगे फिर, तुम्हारे माँ बाप, भाई बहन, बच्चे कहा जाएंगे ? नहीं मेरे भटके हुए मित्रों तुम भी इस बर्बादी का शिकार होगे। तुम्हारी आत्मा तब रोयेगी, कराहेगी पर तुम कुछ न कर पाओगे सिवाय पछताने के। जो पठानकोट में घुसे आतंकवादी न कर सके जिनका मकसद था हमारी सेना का मनोबल गिराने का, वो तुमने कर दिखाया है। तुम जैसे देश के गद्दारों से उनका सर शर्म से झुक गया है। हर सच्चे देशभक्त का सर शर्म से झुका दिया है तुम लोगों ने। काश ईश्वर तुम सब को सुबुद्धि दे !

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