Sunday, June 29, 2014

Are you fit for this new generation?


If you don't smoke..
you don't drink..
you don't go to discotheques..
you are not a frequent visitor of multiplexes, popular restaurants..
you don't ride a macho bike or a costly car..
you don't wear a tattoo on your skin..
you don't have a spiky hair style..
you don't have fancy male ear ring on one of your ears..
you don't have a fancy pair of goggles in between the buttons of your shirt...

Then you are not fit for this generation of youth.. and so forget to dream of having a girl friend in your life...


Don't think you are alone.. I and many persons like us are in the same boat.. For us life is in the following activities -

Writing and blogging..
Doing face book and giving likes to posts and messages, commenting and re-posting the posts of friends...
Doing What's app..
Watching old style movies on TV

Waiting for morning newspaper and reading each and every corner of it...
Solving Sudoku on the newspaper..
Watching and listening Md. Rafi and Kishore Kumar's or if more recent then Kumar Sanu or Sonu Nigam's songs..
Having evening conversation with friends criticizing the so called new generation on evening snacks and tea..
Studying classical novels..

Friends, you must feel yourself fortunate that you still get a life partner as arranged marriages are still prevalent in our society.. Be thankful to your elders otherwise you are so outdated, no girl would ever dream of you...


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Monday, June 23, 2014

यादों की कुछ धुंधली तस्वीर

(कल्पना पर आधारित, आज के युवाओं की सच्ची कहानियो से प्रेरित)
गुजरे हुए वो पल यादों की कुछ धुंधली तस्वीर बन कर रह गए हैं।   तुम्हारा वो मुझसे पहली बार मिलने आना, तब जब मैं तुम्हारे लिए एक अजनबी था।  फिर उस दिन हमारा शहर के सबसे लोकप्रिय जगह साइंस सिटी घूमने जाना और फिर उस दौरान एक दूसरे को जानने की कोशिश करना।  तुम्हारा मुझे उन सब चीजों की जानकारी देना जो मुझे पता न थीं।  तुम्हारे लिए वो एक चिर परिचित जगह थी।  तुम मुझे एक गाइड की तरह उस जगह के कोने कोने से वाकिफ करा रही थी। हमारा वो एक साथ प्लेनेटोरियम में शो देखना, फिर हमारा गगनचुम्बी झूले पर झूलना और वो तुम्हारी ऊंचाई से डर कर मेरा हाथ जोर से पकड़ कर बैठना।  तुम्हारा वो आँखें बंद कर मुझसे चिपक जाना, कितना प्यारा एहसास था वो सब।

उसके बाद से हर रोज दिन भर ना जाने कितनी बार एक दूसरे से फ़ोन पर बातें करना।   फिर कुछ ही दिनों में तुम्हारा मेरे घर आना मेरे घर के कोने कोने को मंत्र मुग्ध कर गयी।   ऐसा लगा जैसे बरसों से खाली उस घर में अचानक से बहार आ गई हो।   तुम्हारा तितलियों सा मेरे इर्द गिर्द घूमना।  तुम्हारी हर वो कोशिश जो सिर्फ इस लिए थी की मैं उस दिन को भरपूर जी सकूँ।  फिर शाम होते होते वापस जाने का वक़्त नजदीक आने पर तुम्हारा उदास हो जाना और उसी उदासी में तुम्हारे वो गीत जो मैं दूर खड़ा सुन रहा था और जिन्हे सुन कर मेरी आँखों में आंसू आ गए थे।   तुम्हे एहसास भी न था की मैं भावुक हो कर तुम्हारे ही पीछे खड़ा हो तुम्हारे वो दर्द भरे गीत सुन रहा था।  तुम अपनी धून में गाती जा रही थी शायद मुझे वे गाने समझ नहीं आ रहे थे मगर तुम्हारी दर्द भरी आवाज़ और तुम्हारे वो सुर मुझे तुम्हारी और बरबस खिचे चले जा रहे थे।  उस वक़्त शायद मैं यही चाहता था कि तुम्हे अपनी बाहों में भर लूँ , मगर ऐसा कर न सका, और फिर तुम चली गयी।

फिर तुम्हारे आने जाने का और हमारे मिलने का क्रम चलता रहा तब तक जब तक की तुम्हारी इंगेजमेंट कही और न हो गयी।   और फिर उस दिन मैं अपने दोस्तों के साथ फिर उसी जगह जहाँ हम पहली बार मिले थे, बुक फेयर देखने गया था।  करीब तीन वर्षों बाद।  वहां पहुंच कर तुम्हारी बहुत याद आ रही थी।   बार बार ऐसा लग रहा था कि काश वहीं कहीं तुम दीख जाती।   मेरे बाकी के दोस्त तो काफी एन्जॉय कर रहे थे, वही मैं अपनी पुरानी यादों में खोया हर चेहरे में तुम्हे ही ढूंढ रहा था।   फिर अचानक एक चेहरे पे नज़र पड़ी।   वही आँखें, वही चेहरा अचानक मेरे सामने से गुज़र कर आगे बढ़ गया।   एक पल को तो ये यकीं ही न हुआ कि वो तुम ही थी।   फिर दोस्तों को थोड़ी देर के लिए वेट करने को बोल कर थोड़ा नज़दीक से उसे देखने की कोशिश की।   वो एक लड़के के हाथ में हाथ डाले उससे बातें करती हुई जा रही थी, ठीक वैसे ही जैसे कभी हम एक दूसरे के साथ आत्मीयता के साथ घुमा करते थे।   यह देख कर मेरे पुरे शरीर में मानो बिजली का करंट दौड़ गया।   मैंने तुम्हारे मोबाइल पर कॉल किया, एक नहीं, मैंने तीन चार बार कॉल किया।   मगर तुमने रिंग जाने दिया।   तुमने उस वक़्त मेरा फ़ोन नहीं उठाया।   मैं परेशान अपने दोस्तों के पास वापस आ गया।   दोस्तों ने पूछा की मैं कहाँ चला गया था , फिर उन्हें पूरी बात बतायी।

अपने ख्यालों को भटकाने के लिए और थोड़ा एन्जॉय करने के लिए मैं जहाँ गया था वहां से ख्यालों का एक नया सिलसिला ले कर घर वापिस आया।   पता नहीं क्या क्या सोच रहा था मैं पूरी शाम।  फिर रात के करीब १० बजे मेरे फ़ोन की घंटी बजी।  मैंने फ़ोन उठाया और दूसरी और तुम थी।  मैं तुमसे बेतहासा सा पूछता गया था कि क्या तुम उस वक़्त बुक फेयर में थी। तुम्हारे हाँ कहने पर न जाने कितने प्रश्न पूछता चला गया। तुमने मुझसे सारी बातें बताईं थी।  तुमने यह भी बताया की ये वही लड़का था जिससे तुम्हारी इंगेजमेंट फिक्स हुई है।  तुम्हारी बातें सुन कर मेरा सारा गुस्सा मेरी मज़बूरी की शक्ल ले कर मेरे मन से बाहर निकल आया।   फिर तुमने अपने होने वाले पति के बारे में बताया कि वो कितने अच्छे हैं, काफी शर्मीले हैं और बहुत केयरिंग भी।  सब सुन कर अंदर से जलन भी हो रही थी।   मगर किस्मत की लकीरों ने मेरी कहानी में यही लिखा था।   फिर कुछ दिन तुम्हारे खट्टे मीठे अनुभवों को सुनता रहा फ़ोन पर।   मगर फिर शायद तुम्हे भी एहसास हो गया कि तुम्हारी वो बातें मेरे दिल को सुकून कम, और दर्द ज्यादा देते हैं।   फिर हमारा फ़ोन पर बातें रोज से हफ्ते दो हफ्ते में और अब तो महीनो में होती है।  और वो भी जब कभी तुम्हारा अपने मंगेतर से झगड़ा होता है या किसी वजह से तुम बहुत परेशान होती हो। क्या कहूँ तुम्हे, फिल्मों में या नोवेल्स के नायकों को अक्सर दिल टूट जाने पर अपने प्रेयसि को मन से ज़िन्दगी भर खुश और आबाद रहने में अपनी ख़ुशी को शामिल करते देखा है।   क्या मैं भी ऐसा कर पाउँगा ?

मित्रों, कभी कभी हम न चाहते हुए भी ज़िन्दगी के सफर में किसी स्टेशन पर मिले मुसाफिर की तरह एक दूसरे की यादें बन कर रह जाते हैं।

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आर्थिक बदहाली की सूरत में मोदी सरकार की कड़वी दवा - रेल किराए में वृद्धि का आकलन

आज मेरे एक महिला सहकर्मी ने मुझे मेरे फेसबुक के टाइम लाइन पर पूछा कि आप भाजपा एवं उसके मुखिया मोदी जी के तारीफों के पूल बांधते थकते नहीं, आज जब उन्होंने रेल किराये में १४ प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है तो इसके ऊपर कुछ क्यों नहीं लिखते।    मित्रों, मोदी जी के प्रधान मंत्री बनने के बाद कोई राजनीतिक टिप्पणी मैंने काफी कम की है।   वैसे महंगाई बढ़ना किसे पसंद है ?  किन्तु महंगाई का बढ़ना और उसका अनियंत्रित होना इन दो स्थितियों में बहुत फर्क होता है।   हमारी पिछली सरकार ने महंगाई को अनियंत्रित कर दिया था।   महंगाई को नियंत्रित करने के जो ठोस उपाय पिछले दस वर्षो तक राज कर चुकी हमारी पिछली सरकार को करना चाहिये था, उसने नहीं किया।   हाथ पर हाथ धरी बैठी मौनी बाबा की वह सरकार हमारे देश को कई दशक पीछे धकेल गयी।  ना सिर्फ इस सरकार ने हमारे सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर को कई दशकों के निचले स्तर तक पहुंचा दिया, साथ ही भ्रस्टाचार के नित नए कृतिमान भी स्थापित किये।  जिसकी वजह से हमारा देश अप्रत्याशित अवांछित कर्ज की बोझ तले बुरी तरह दब चुका है।  पिछली सरकार के शाशन में देश के खजाने को बुरी तरह लूट लेने के बाद और अर्थव्यवस्था को पूरी तरह खोखला एवं अपंग बना देने के बाद, हमारे देश की नयी सरकार के सामने देश  अर्थव्यवस्था को पटरी पर वापस लाने की बहुत बड़ी चुनौती है।

मित्रों, हम सब भाग्यशाली हैं की आज हमारे देश की बागडोर एक कर्मयोगी एवं देश भक्त के हाथों सुरक्षित है।   हमें विश्वास है की मोदी जी न सिर्फ हमारे देश को इन विषम परिस्थितियों से बाहर निकालेंगे, बल्कि हमारे देश को सफलता की नयी बुलंदियों तक पहुचाएंगे।   मगर इस बात को करने में काफी वक़्त लगेगा, यह हम सब को समझना होगा।  ये सब करना इतना आसान नहीं है , ये कोई जादू की छड़ी नहीं है कि छड़ी घुमाई और सब कुछ अच्छा हो गया।   देश बहुत बड़ा है, आबादी बहुत बड़ी है।   सबको साथ ले कर चलना है, सबकी विकास करनी है।   इसमें कृषि क्षेत्र है, औद्योगिक क्षेत्र है, स्वास्थय है, बिजली, सड़क, पानी है।   लोगों को सबल बनाना है मोदी जी का मुख्य उद्देश्य।   यानी कि हर कोई इस काबिल हो सके कि उसे किसी सब्सिडी की, किसी अनुदान की जरूरत ही न पड़े।   ना कोई निर्बल हो, ना कोई भूखा हो, ना कोई नंगा हो, ना कोई अपाहिज हो।   उनकी सोच है कि आज हमें एक ऐसे राष्ट्र के रूप में विकसित होना है जिसकी पहचान उसकी सबल, जागरूक और स्वाबलंबी जनता हो।

जहाँ तक रेलवे किराए में एवं माल ढुलाई में बढ़ोतरी की बात है, मुझे जहाँ तक लगता है कि हम इस बात का विरोध सिर्फ इस लिए करते हैं क्यों कि यह मामला रेल से जुड़ा है।  मित्रों, हम ऐसा क्यों सोचते हैं कि रेलवे किराया न बढाए?  रेलवे एक संस्था है जो प्रत्यक्षतः लाखों हिन्दुस्तानियो को नौकरी प्रदान करता है तथा अप्रतयक्ष रूप से करोडो लोगों को रोजगार प्रदान करता है।   रेलवे विभाग का विशालकाय स्वरुप हमारे देश को विश्व का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क होने का गौरव प्रदान करता है।   किन्तु इसे संचालित करना रेलवे प्रबंधन के लिए बहुत ही कठिन कार्य है।  सभी प्रकार के इनपुट कॉस्ट जैसे स्टील, ईंधन, वेतन इत्यादि के कॉस्ट में वृद्धि के साथ अगर किराए में वृद्धि न की जाए तो रेल विभाग की भी वही स्थिति हो जायेगी जैसी की हाल के वर्षों में एयर इंडिया की हो गयी है।   एयर इंडिया की तो लगभग दिवालिया होने जैसी नौबत आ गयी है।   कई महीनो के वेतन कर्मचारियों के बकाये हैं।   कितने ही कर्मचारियों को काम से निकाल दिया गया है।  क्या हम चाहते हैं कि रेलवे की स्थिति भी ऐसी हो जाए ?  नहीं ना, फिर हमें इस बात को समझना होगा कि अगर हम साबुन, तेल, दवा, खाने की वस्तुओं पर ज्यादा पैसे खर्च कर सकते हैं।   ऑटो और टैक्सी के बढे हुए किराए को देने के लिए तैयार रहते हैं।   सिनेमा के टिकटों पर कई गुने वृद्धि हो जाने पर भी उसका विरोध नहीं करते।   रेस्टोरेंट में खाना खाने और महंगे होटलों में रात बिताने पर और होटल में बैरों को टिप देने में गुरेज नहीं करते तो फिर रेल किराए में बढ़ोतरी पर इतना हो हल्ला क्यों करते हैं ?  मैं मानता हूँ कि रेल यात्रा सबके लिए महंगे हो गए हैं, किन्तु आज भी रेल यात्रा बाकी के आवागमन के माध्यमों से काफी सस्ता है।   शायद उन लोगों को जो एयर कंडीशन कोचों में सफर करते हैं, उनको यह १४ प्रतिशत की बढ़ोतरी ज्यादा लग रही होगी क्यूंकि उनकी किरायों में अत्यधिक वृद्धि है।   यह तो एक तरह से अच्छा ही है कि गरीबों  की अपेक्षा जो ज्यादा पैसे खर्च करने में सक्षम हैं, उनके ऊपर किराए का बोझ ज्यादा पड़े।

मेरी इस नयी सरकार से यही अपेक्षा है कि उनके किये गए वादों के अनुसार जितनी जल्दी हो सके, प्राइवेट पार्टनरशिप में रेलवे का काया-कल्प करें और यात्रियों के लिए ज्यादा से ज्यादा सुरक्षा एवं सुविधा प्रदान की जाए।   साथ ही माल ढुलाई के लिए अलग मार्ग एवं बुलेट ट्रैन की शुरुआत जैसे नए प्रस्तावों को जल्द से जल्द अमल में लाया जाए।   इसके लिए शुरुआत में थोड़ी कड़वी दवा भी पीनी हो तो हम पीने को तैयार हैं बशर्ते कि सरकार की सार्थक प्रयास रंग लाने को तैयार हो।
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Saturday, June 21, 2014

Office Spouses - a reality in today's Corporate world

Office Spouse is a term usually common for the western world where there happens to be a close relationship between two individuals of opposite sexes working together in the same office. In today's world working hours at office have become longer because of extra workloads. In this scenario, people often remain in offices more than they do in their homes. Even at homes after coming back from office, they remain quite tired and dull. As a result they hardly get time to interact with their real spouses at home. Even taking dinner or breakfast together is not a surety if both the spouses are working. In this scenario, it is often seen that they find someone among their colleagues who due to their nature of job lead more time with each other and hence develop natural affinity. They share their happy and sad moments together like spouses. They give a healing touch to each other whenever they require so. Many organisations recognize and value these relationships as they think such relations keep the mood and motivation of their employees conducive for work as they don't remain occupied with the personal problems and tensions of the home at their workplaces. Well now a days the same concept has taken space in Indian metros, not only in Private Sector but also in Public Sector Companies. We may often see married people having affairs with their office colleagues. Taking lunch together everyday, moving with each other hand in hand, taking leave and going to Cinemas, malls, parks and making short duration trips either for business purposes or for fun ride, just the two together are very common features of such relationships. This is very common these days, though we still don't name that relationship as 'Office Spouse'. But I feel in next few years this word would be commonly used here as well. Well People say, "Love knows no bars". "Happiness if not available at home, get it from where ever you find it" is the new life mantra of the new generation and those under their forties.

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Thursday, June 5, 2014

European Central Bank's easing of interest rate and its impact on India

Today I came to know that ECB (European Central Bank) cut the deposit rate from 0 % to - 0.1%.  It also reduced the prime lending rate from 0.25 to 0.15%.  The inflation rate in Europe is 0.5 %.  What does this mean?  If you put your money into bank in India, a savings interest of 4 % is given but if a person in Europe wants to keep his savings in bank there, the bank will charge him 0.1% for the same and no interest would be given, first.

Second if someone wants to take loan be it the person or a company, it will be available at a rate so cheap as 0.1 percent.  (This may be a bit higher if other considerations are taken into account as this is the Central bank's rate.)

Now let us understand the implications of it.  The growth there in Europe is static.  Economy is not moving and so the return from the industries or even investments there is not good.  This is the reason why they are putting their money in developing economy where risk and returns are favourable.  No wonder why Indian Equity Indexes are showing unprecedented highs.  FIIs are putting huge amount of money in India and this has translated in the movement of share prices of small and mid size enterprizes in India.

Another favorable scenario can be considered that where India has a high interest rates environment, in Europe the loans are so cheaper.  Now those companies having good corporate governance and good credit history are able to get cheaper loans from those markets and this way they would be able to utilize these funds to translate that into good topline and bottom line growth.

Also India can't remain isolated from the world banking environment.  In near future we would be able to see easing of interest rate and it would be a long term easing scenario soon.  Just wait and see..

India, Jai ho!

https://www.facebook.com/manoj.sapiens मित्रों यदि मेरा यह पोस्ट आपके दिल को जरा भी छू कर गुजरा हो तो मुझे विश्वास है कि आप मेरे इस प्रयास को लाइक दे कर मुझे और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा, स्नेह और आशीर्वाद देंगे। आप अगर मुझे मेरे फेसबुक प्रोफाइल पर फॉलो करते हैं तो आपको मेरे शेयर किये सारे पोस्ट्स आपके नोटिफिकेशन्स में मिलते रहेंगे। मुझे फॉलो करने के लिए ऊपर दिए फेसबुक लिंक को क्लिक कर मेरे टाइम लाइन पर जा कर फॉलो के लिंक को क्लिक करें। धन्यवाद।

India in 2050 : on course of becoming an economic superpower and alleviating poverty

Day before yesterday I was discussing with my friends how despite so much of progress we have failed to provide the living standard to maj...