मित्रों, हम सब में से काफी लोगों की एक कॉमन आदत होती है, सुबह का अखबार पढ़ना। और सुबह सुबह हम अखबार के हमारे दरवाजे तक पहुँचने का बहुत बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। हम सबके पास पेपर पहुचाने वाला वेंडर सुबह अखबार हमारे घरों या फलैटों में फेंक कर या दरवाजे के नीचे से डाल कर चला जाता है। जिस किसी दिन वह अखबार देने में लेट हो जाए, हम बेचैन हो उठते हैं। यह अखबार बांटने वाले न जाने कितनी सुबह उठ अपनी बाइसिकल उठा कर अखबार लेने पहुचते हैं और फिर उसको अपनी साइकिल पर रख कर मीलों तक लोगों को घर घर अखबार की डिलीवरी करते हैं। चाहे जाड़ा हो, गर्मी हो या तेज बारिश, उनके रोज की दिनचर्या यही होती है।
अखबार वालों को छुट्टिया कम ही मिलती हैं, हफ्ते के सातों दिन उन्हें अखबार छापना होता है। हमने सामान्यतः देखा है, उनके लिए गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर दो दिन छुट्टिया फिक्स होती हैं और शायद साल में उन्हें इन दो दिनों के अलावा एक या दो दिन और छुट्टियां मिलती हैं। अखबारों में काम करने वालो के लिए उनका काम कितना मुश्किल होता है, हम इसी बात से महसूस कर सकते हैं। रात जब हम अपने घरों में चैन की नींद सोते हैं, अखबार वाले देर रात तक हमारे लिए अखबार छापने में लगे होते हैं ताकि हम सब को बिल्कुल ताज़ी खबर सुबह पढ़ने को मिले। हमने अक्सर लोगों के द्वारा अखबार और मीडिया वालों को कोसते हुए देखा है, मगर सच्चाई ये है कि अगर एक दिन हमें सुबह अखबार न मिले तो पूरा दिन खाली खाली सा लगता है, कुछ खोया खोया सा महसूस होता है। कई लोगों की तो सुबह शौच जाने से पहले अखबार पढ़ना जरूरी होता है वर्ना पेट पूरा खाली नहीं होता।
सेवानिर्वृति के बाद अक्सर बुजुर्गों के पास जब कुछ ख़ास करने को नहीं रहता, उनके साथ टाइम बिताने को, बातें करने को कोई नहीं रहता- उस वक़्त उनका सबसे नजदीकि साथी अगर कोई होता है तो वह अखबार ही होता है। अक्सर उन्हें दिन भर अखबार के एक एक पन्ने को और एक एक सेक्शन को उलट पलट कर पढ़ते हुए देखा जा सकता है। टीवी न्यूज़ चैनल्स एवं इंटरनेट पर मौजूद पल पल के खबरों के अपडेट्स और उनकी पॉपुलरिटी के बावजूद आज भी प्रिंट मिडिया ख़ास कर अखबारों का महत्व कम नहीं हुआ है। जहाँ एक तरफ टीवी पर मौजूद न्यूज़ चैनल्स एक ही ढर्रे पर सामान्यतः एक ही तरह के न्यूज़ जो अक्सर पॉलिटिक्स से सम्बंधित होते हैं, हर चैनल पर दिखाते हैं, वहीँ अखबारों में हमारे पास तरह तरह के समाचार होते हैं। हर किसी को अपने अपने पसंद के हिसाब से उसमे उनके लिए अलग से कॉलम मिल जाते हैं, चाहे वो अखबार का पहला पेज हो या खेल का पेज हो, राजनीति का पेज हो, लोकल न्यूज़ का पेज हो या विदेश की खबर का पेज हो या फिर वाणिज्य या अर्थव्य्वस्था का पेज हो। एक पेज जिसमे सम्पादक का कॉलम होता है ज्यादातर प्रबुद्ध लोगों को वो पेज बहुत पसंद होता है। युवा वर्ग के लोगों व महिलाओं में पेज थ्री और अखबार के साथ रंगीन पन्नों में आने वाले सुप्प्लमेंटरी (मैग्ज़ीन) बहुत पसंद होती है।
अखबार अक्सर अनजान लोगों के बीच दोस्ती या जान पहचान बनाने का भी काम करती है। अक्सर ट्रेन या बसों में सफ़र करते वक़्त हम साथ बैठे यात्री से उसके हाथ का अखबार उनसे मांग कर पढ़ते हैं और इस तरह एक दूसरे से बात की शुरुआत भी होती है। कई बार इसी के बहाने देश विदेश के कई मुद्दों पर आपस में चर्चा भी हो जाती है।
अखबारों का अक्सर कई तरीके से प्रयोग किया जाता है। अखबार के कई खबरों और उनमें निहित तस्वीरों को काट कर उसका एल्बम या फ़ाइल बनाने का भी कई लोगों को शौक होता है और इस तरह काफी यादगार इवेंट्स वे अपने दोस्तों के साथ शेयर करते हैं। आप किसी भी दफ्तर में जाएँ, वहाँ रिसेप्शन या वेटिंग रूम में तिन चार तरह के अखबार मिल ही जायेंगे ताकि आप उस दौरान बोर न हों। चाय नाश्ता के दुकानो से ले कर सलून तक हर जगह आपके लिए अखबार ही इंतज़ार के वक़्त का टाइम पास होता है। आज भी लोकल जनरल स्टोर वाले अखबार के बनाये लिफ़ाफ़े में ग्राहकों को सामान पैक करके देते हैं। गृहणियाँ अक्सर इंतज़ार करती हैं कि कब पुराने अखबार इकट्ठे हो जाएँ और रद्दी अखबार लेने वाला उनके घर आ कर उसे ले जाए, बदले में उन्हें जो कुछ पैसे वो देते हैं उससे वे काफी खुश होती हैं। अखबार से न जाने कितने खिलोने और सजावट के सामान बनाये जाते हैं। वास्तव में हम सबके लिए अखबार का महत्व इतना ज्यादा है कि उसके बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते।
मित्रों, यह विषय मैंने इस लिए चुना क्यूँ कि हम शायद ही कभी अखबार वालो को उनका क्रेडिट देते हैं। हमलोगों को अखबार वालों के अथक प्रयास को जरूर सम्मान देना चाहिए और इससे जुड़े हर कर्मचारी चाहे वह डिलीवरी बॉय ही क्यूँ न हो उसके महत्व को समझना चाहिए। एक बार मन से हम सब अखबार वालों का नमन करें ऐसी मेरी आशा है। धन्यवाद !
--------------------------------------------------------------------
मित्रों यदि मेरा यह पोस्ट आपके दिल को जरा भी छू कर गुजरा हो तो मुझे विश्वास है कि आप मेरे इस प्रयास को लाइक दे कर मुझे और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा, स्नेह और आशीर्वाद देंगे। आप अगर मुझे मेरे फेसबुक प्रोफाइल पर फॉलो करते हैं तो आपको मेरे शेयर किये सारे पोस्ट्स आपके नोटिफिकेशन्स में मिलते रहेंगे।
No comments:
Post a Comment