१९९९ से लेकर आज तक भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को अपनी पूरी ताकत के साथ कोसने वाले विभिन्न राजनीतिक दल हमेशा से ही एक कृत्रिम डर दिखा कर वोटों का ध्रुवीकरण करने में लगे हैं। सेक्युलर बनाम कम्युनल का गन्दा खेल खेलने वाले ऐसे राजनीतिक दलों ने पिछले कई सालों से यही डर दिखा कर अल्पसंख्यकों को अपनी तरफ करने की भरपूर कोशिश की और उसमे बहुत हद तक सफल भी रहे हैं। इस तरह भाजपा के खिलाफ लामबंद हो कर ये पार्टियाँ अनैतिक तरीके से सत्ता में एक दूसरे का सहयोग करती रही। जनता की भलाई और देश के विकास को ताक पर रख कर इन पार्टियों ने जम कर भारत वर्ष के खजाने को लूटा। पिछले दस वर्षों में देश की ऐसी दुर्दशा कर दी कि दुनिया के देशों के बीच हमारे देश की साख और सम्मान अब तक के न्यूनतम स्तर पर आ गयी है। दुनिया के बड़े देशों के समूहों के सम्मेलनों में यह स्थिति साफ़ साफ़ परिलक्षित होती है। यही देश जो श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में दुनिया के सबसे तेज विकास करने वाले अग्रणी देशो में से एक था। चाहे अर्थ व्यवस्था का प्रश्न हो, जीडीपी के विकास दर की बात हो, शिक्षा, रोजगार, विज्ञान, तकनीकी, रक्षा, विदेश नीति, सामाजिक समरसत्ता की बात हो, हर तरफ चौतरफा विकास हो रहा था। वहीँ आज की स्थिति बिल्कुल इससे उलट हमारे देश को एक कमजोर, विश्व में हर रैंकिंग में पिछड़ती, भ्रष्टाचार में पूरी तरह से डूबी, नकारात्मक विकास दिखाती अर्थव्यवस्था, महंगाई के चरमोत्कर्ष पर विराजमान राष्ट्र के रूप में प्रदर्शित करती है।
एक बार फिर से ऐसे राजनीतिक दल वोटों की राजनीति के तहत अल्पसंख्यकों को अपनी तरफ वही पुराना डर दिखा कर अपनी तरफ करने की भरपूर कोशिश में लगे हैं। भाजपा एवं उसके प्रधान मंत्री उम्मीदवार के खिलाफ जनता के समक्ष जहर उगल रहे हैं। किन्तु जनता ने पिछले कई दशकों के इन दलों के छलावे को अच्छी तरह से समझते हुए इस बार इन दलों को सबक सिखाने का निर्णय लिया है। टीवी चैनलों पर दिखाए जा रहे ओपिनियन पोल्स भी यही दिखा रहे हैं। भाजपा से मोदी विरोध के चक्कर में अपना गठबंधन तोड़ने वाले नितीश कुमार जी का सूपड़ा बिहार से साफ़ होने जा रहा है। भाजपा वहाँ बाकी हिंदी भाषी राज्यों की तरह ही एक आंधी की तरह ज्यादातर सीटों पर अपनी जीत दर्ज करवाने जा रही है। मोदी जी के खिलाफ जितना ही ये दल विरोध के स्वर तेज करते हैं, झूठा प्रॆचार करते हैं, अल्पसंख्यकों को बेवजह डर दिखाते हैं, मोदी जी की जनता के बीच समर्थन और स्वीकार्यता उतनी ही बढ़ती है। समझ नहीं आ रहा इन राजनीतिक दलों को यह सब क्यूँ नहीं दिख रहा कि उनके इन्हीं करतूतों के वजह से आज भारतवर्ष की अधिकाँश जनता पूरी तरह मोदी जी के साथ है। मुझे तो लगता है कि दक्षिण और पूर्वी भारत में भी इस बार मोदी की लोकप्रियता के वजह से कई सीट आ सकती हैं। बस आप विभिन्न राजनीतिक दल मोदी का विरोध करते रहिए और मोदी की जीत सुनश्चित करते जाइये। धन्यवाद मित्रों।
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