Written by- Manoj Kumar Abhimanyu
एक बार खुल कर जीना चाहता हूँ
इस बेरंग ज़िन्दगी में रंग बिखेरना चाहता हूँ।
बरसों ने दिया मुझे तन्हाई की सौगात
खुशियों कि तलाश में गिनता रहा दिन रात!
सोचा था मिल जायेगा साथ किसी हमसफ़र का
छट जाएगा घना अँधेरा तब मेरी ज़िन्दगी का।
दिल के घावों पर मरहम खुद ही लगाना होता है
इंतज़ार के अनगिनत पलों को खुद ही में सिमेटना होता है।
न जाने कितनी बार दिया मुझे इस दिल ने धोखा
हर बार लेकिन मैं बेरंग खाली हाथ ही लौटा।
उम्मीदों का दामन छोड़ना कभी सिखा ही नहीं
खुशियो को गले लगाना कभी आया भी नहीं।
अंतहीन गहरी नींद में जाने से पहले
एक बार खुल कर जीना चाहता हूँ
इस बेरंग ज़िन्दगी में रंग बिखेरना चाहता हूँ।
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मित्रों यदि मेरा यह पोस्ट आपके दिल को जरा भी छू कर गुजरा हो तो मुझे विश्वास है कि आप मेरे इस प्रयास को लाइक दे कर मुझे और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा, स्नेह और आशीर्वाद देंगे। आप अगर मुझे मेरे फेसबुक प्रोफाइल पर फॉलो करते हैं तो आपको मेरे शेयर किये सारे पोस्ट्स आपके नोटिफिकेशन्स में मिलते रहेंगे।
इस बेरंग ज़िन्दगी में रंग बिखेरना चाहता हूँ।
बरसों ने दिया मुझे तन्हाई की सौगात
खुशियों कि तलाश में गिनता रहा दिन रात!
सोचा था मिल जायेगा साथ किसी हमसफ़र का
छट जाएगा घना अँधेरा तब मेरी ज़िन्दगी का।
दिल के घावों पर मरहम खुद ही लगाना होता है
इंतज़ार के अनगिनत पलों को खुद ही में सिमेटना होता है।
न जाने कितनी बार दिया मुझे इस दिल ने धोखा
हर बार लेकिन मैं बेरंग खाली हाथ ही लौटा।
उम्मीदों का दामन छोड़ना कभी सिखा ही नहीं
खुशियो को गले लगाना कभी आया भी नहीं।
अंतहीन गहरी नींद में जाने से पहले
एक बार खुल कर जीना चाहता हूँ
इस बेरंग ज़िन्दगी में रंग बिखेरना चाहता हूँ।
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