मित्रों, खेल जगत में आज भारत की टेस्ट क्रिकेट में मिली न्यूजीलैंड के हाथों पराजय के साथ ही भारत की अंतर्राष्ट्रीय भूमि पर गत ११ मैचों में से १० में पराजय तथा एक मैच का ड्रा होना, क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ा ही दुखद अनुभव पेश करता है। जहाँ एक और हम क्रिकेट में एक के बाद एक पराजय का दौर देख रहे हैं, वही दूसरी तरफ भारतीय हॉकी की भी तस्वीर कोई ख़ास अच्छी नहीं है। कभी हॉकी की दुनिया का बादशाह माने जाने वाला हमारा देश आज विश्व रैंकिंग में काफी पीछे खिसक चुका है। विश्वस्तरीय हॉकी प्रतियोगिताओं में हाल के दौर में हमारे हॉकी टीम का प्रदर्शन शर्मशार कर देने वाला है।
मित्रों, आज कल इंडियन हॉकी लीग का दूसरा या तीसरा संस्करण देश के विभिन्न शहरों में आयोजित हो रहा है। मगर देश का राष्ट्रीय खेल माने जाने वाले हॉकी एवं उसको बढ़ावा देने के लिए आई पी एल के तर्ज पर प्रारम्भ किये गए इस प्रतियोगिता को टीवी और मीडिया कोई महत्व नहीं दे रहे। हां अखबारों के माध्यम से खेल पेज पर किसी छोटे से कॉलम में इसकी न्यूज़ मिल जाती है, वह भी आपको बहुत ध्यान से ढूंढना पड़ेगा। हॉकी के प्रति इस प्रकार की उदासनीता देख कर मन बड़ा व्याकुल हो उठता है। क्रिकेट के चकाचौंध ने हमारे न्यूज़ चैनल्स एवं उनके रिपोर्ट्स को भी दूसरे खेलों के प्रति अंधा बना कर रख छोड़ा है।
भारतीय ओलिंपिक एसोसिएशन पर बैन लगने के बाद पहली बार इस वर्ष के विंटर ओलंपिक्स में हमारे देश के खिलाड़ी बिना हमारे देश के बैनर तले इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गए हैं। भारतीय खेल प्रेमियों के लिए यह कितने शर्म की बात है। आज आनन् फानन में बी सी सी आई अध्यक्ष श्री एन श्रीनिवासन के भाई श्री एन रामचंद्रन को इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन का अध्यक्ष चुन लिया गया है। विदित हो कि श्री एन श्रीनिवासन आई पी एल को ले कर पहले से ही काफी विवादों में ग्रस्त रहे हैं। न्यूज़ रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उनका आई सी सी का अध्यक्ष बनना भी तय है। इस तरह देखें तो उनके विवादित पृष्ठभूमि के बावजूद उनके फाइनेंसियल क्लाउट के वजह से उन्हें प्रमोशन दिया जा रहा है।
अंत में मित्रों इन सभी अंधकारमय परिस्थितियो के बावजूद हमारे कुछ जाबांज खिलाड़ियों का हाल का प्रदर्शन जरूर आपके साथ शेयर करना चाहूंगा। भारत में आयोजित एक टेनिस चैलेंजर प्रतियोगिता के फाइनल में पहुचे भारत के नंबर १ पुरुष सिंगल्स खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन को भारत के नंबर २ पुरुष सिंगल्स खिलाड़ी युकी भांभरी ने हराकर यह प्रतियोगिता जीत ली है। इसके साथ ही भारत के पुरुष सिंगल्स के दोनों ही शीर्ष खिलाड़ी विश्व के शीर्ष १५० खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं, जो कि भारतीय टेनिस इतिहास में पहली बार हुआ है। पिछले कुछ दिनों से युकी भांभरी अंतराष्ट्रीय स्तर पर काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। काफी समय से नंबर एक के स्थान पर काबिज सोमदेव देववर्मन को इस मैच में युकी के द्वारा उन्हें पराजित करना, भारतीय खिलाडियों के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता के शुरआत की दस्तक दे रहा है। इस तरह की शुरुआत पहले बैडमिंटन में हम देख चुके हैं जहाँ विश्वस्तर की दो महिला खिलाड़ी साइना नेहवाल और पी वी सिंधु कई बार एक दूसरे से सेमीफाइनल या फाइनल में एक दूसरे से भिड़ती दिखती हैं। वरना तो १२० करोड़ की आबादी वाले इस देश में हमें ज्यादातर यही देखने को मिलता है कि विश्व स्तर पर किसी खेल में एक खिलाड़ी टॉप की रैंकिंग में उभर कर आता है , लेकिन उसको चैलेंज करने वाला दूसरा कोई खिलाड़ी हमारा देश पैदा नहीं कर पाता।
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