Tuesday, December 2, 2014

तुम हो भी या नहीं !

किसी ने मुझमे इंटेलेक्ट ढूँढा, किसी ने ढूँढा इंटेलिजेंस। 
किसी ने मुझमे स्मार्टनेस ढूँढा, किसी ने ढूँढा टैलेंट। 
किसी ने मुझमे दौलत ढूँढा, किसी ने ढूँढा सक्सेस। 
किसी ने मुझमे पावर ढूँढा, किसी ने ढूँढा प्राइड।  

काश कोई होता जो मुझमे ढूंढता मुझको। 
एक सरल हृदय, एक प्रेम की गागर। 
छोटी सी आशा भरी निग़ाहें। 
अल्हड़ बादलों सा मंडराता 
निश्छल सादगी भरा एक मन। 

हाँ यही तो हूँ मैं 
न जान सका कोई 
पहचान सका कोई।  

ग़र हो तुम कहीं 
तो कहाँ हो तुम 
आवाज़ तो दो मुझे 
कि तुम हो भी या नहीं !


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