Saturday, March 15, 2014

हाथी - इंसानो के मित्र और हमारे देश के अनमोल धरोहर

पश्चिम बंगाल के कई जंगलों एवं उससे लगे गावों में अक्सर इंसानो और हाथियों के बीच संघर्ष की खबरें आती रहती हैं।   हाथी स्वभाव से काफी शांत जानवर हैं, वे जान बुझ कर इंसानो के रास्ते नहीं आना चाहते, किन्तु सिकुड़ते वन क्षेत्र एवं इन विशालकाय जीवों के लिए भोजन की कमी इन्हे लहलहाते खेतों और उनमें खड़ी फसल की तरफ आकर्षित करती हैं।  झुण्ड में आने वाले ये हाथी गावों के कई एकड़ में फैले फसलों को बर्बाद कर देते हैं।  कई बार ये हाथी अपने रास्ते में आने वाले मकानो को भी उजाड़ देते हैं।   मजबूरन गाँव वालों के साथ इनका संघर्ष होता है जिसके एवज में कई बार कुछ इंसान मारे जाते हैं, कई बार इन हाथियों को जहर देकर या बिजली के तारों में झुलसा कर मार दिया जाता है।   हालांकि हाथियों को संरक्षित श्रेणी में रखे जाने के बाद हाथियों को जान बुझ कर मार देने की ज्यादा खबरें नहीं मिलती, मगर इक्का दुक्का ऐसे उदाहरण कभी कभी देखने को मिल जाते हैं।

मित्रों, हमें यह बात समझना होगा कि हाथी हमारे देश के धरोहर हैं।  जहाँ एक ओर दुनिया के अधिकाँश क्षेत्रो से हाथी लुप्तप्राय हो चुके हैं, वहीँ दूसरी तरफ भारत एवं इसके सीमावर्ती देशों तथा अफ्रीका के देशों में अभी भी हाथी बचे हुए हैं, किन्तु आज से कुछ दशक पहले जितनी इनकी संख्या थी उसका १० प्रतिशत भी अब नहीं बची।  इसका कारण स्पष्ट है जिस तेजी से हमारे देशों में जनसँख्या का बोझ बढ़ा है, उतनी ही तेजी से संसाधनो को जुटाने के चक्कर में जंगलों को अंधाधुंध काटा जाता रहा है।   परिणामस्वरूप हमारे देश की आजादी के वक़्त का करीब ७० प्रतिशत वन संरक्षित क्षेत्र आज २० प्रतिशत से भी नीचे आ चूका है।   अब इन क्षेत्रों में रहने वाले जीवों के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगने स्वाभाविक ही है।   न जाने कितने जीवों और पक्षियों की प्रजाति भारत के वनों से विलुप्त हो चुकी हैं।   हाथी शुद्ध शाकाहारी जीव होते हैं।  अपने विशालकाय शरीर के वजह से इनके भोजन का मुख्य श्रोत जंगलों के पेड़ पौधों के अंधाधूंध कटाव के वजह से इनकी संख्या में कमी आना स्वाभाविक ही है।

अगर हमें अपने देश के इस धरोहर को बचाना है तो हमें जंगलों को न सिर्फ बचाना होगा बल्कि अधिक से अधिक जंगलों का विस्तार करना होगा।  मित्रों, प्रायः हम सबने हाथियो को बहुत करीब से देखा होगा।   उन्हें अपने हाथो से छुआ भी होगा और कुछ लोगों ने उसकी सवारी भी की होगी।   इतने विशालकाय शरीर का स्वामी होने के बावजूद भी हमने इन्हे कितनी शान्ति से मंदिरों के सामने भक्तों को अपने सूंड से आशीर्वाद देते देखा होगा।   आपने इन्हे इंसानो के कई झांकियों में भाग लेते देखा होगा।   जंगल में सफारी का काम भी यही करते हैं जहाँ अपने पीठ पर बिठा कर ये हाथी टूरिस्ट्स को जंगल की सैर कराते हैं।   जंगल में न जाने कितने कार्यों के लिए इन्हे इस्तेमाल किया जाता है।

हाथी सामाजिक प्राणी होते हैं।   जंगलों में यह झुण्ड में निवास करते हैं जिसमे बड़े-बूढ़े, जवान और शिशु हाथी सब एक साथ रहते हैं और एक दूसरे की मदद के लिए सदा तत्पर रहते हैं।  शिशु हाथियों की सुरक्षा के लिए ये हाथी हमेशा घेरा बना कर चलते हैं।  अक्सर विदेशों में इनके प्रति अनेक भ्रांतियां होती हैं।   विदेशों में बने कई फिल्मों में इन्हे डायनासोर की तरह का भयावह प्राणी दिखाया गया है जो अक्सर सच्चाई से परे होता है।   वस्तुतः हाथी इंसानो के प्रति बहुत वफादार होते हैं।   एक बार इंसानो से दोस्ती कर ली तो फिर ये हाथी उनके लिए जान तक देने को तैयार हो जाते हैं।   हाथी बड़े ही इमोशनल जानवर होते हैं।   साथ ही ये बहुत बुद्धिमान भी होते हैं।

मित्रों, हाल में टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी यह खबर उनके इमोशनल व बुद्धिमान होने का एक और उदाहरण पेश किया है।   हाथियो के झुण्ड में से एक हाथी ने इंसानो के साथ के संघर्ष में जब एक मकान को ढाह दिया तो उसमे एक नन्हा मानव शिशु दब गयी, हाथी जब वह से लौटने लगा तो उसने उस मानव शिशु के रोने की आवाज़ सुनी।   यह सुन कर वह वापिस उस घर की तरफ मुड़ा और वहाँ मलवे में पड़े एक एक ईंट को हटा कर बच्चे को बचाया और फिर वहाँ से वापिस गया।   यह कोई अनोखी घटना नहीं है, इन गावों में निवास करने वाले कई लोगों ने बताया कि हाथी बड़े ही इमोशनल होते हैं और इस तरह कई बार इन्होने इंसानो की जान बचाई है।   क्या हम अपने देश के इन धरोहरों को नहीं बचाएंगे?

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