कुछ दिनों पहले टैक्सी से एअरपोर्ट जाते हुए मैंने यहाँ कोलकाता के एक इलाके में एक बड़ा ही रोचक नजारा देखा। रविवार के दिन सुबह के करीब ६.३० बज रहे होंगे जब मैंने देखा कि सड़क किनारे एक बहुत ही बड़ा पुराने कपड़ों का बाज़ार लगा है। और जिसके वजह से इतने सुबह भी लोगों की भीड़ इतनी थी कि सड़क पर जाम लग गया था। मैंने देखा स्त्री पुरुषों एवं बच्चो की भीड़ में कोई साडी देख रहा है, कोई टी-शर्ट, कोई लड़कियों की टॉप, सलवार और कोई पैंट, सभी अपनी आशा भरी नज़रों से उन कपड़ों में से अपने लिए कुछ ढूंढ रहे थे कि शायद उन्हें आज के फैशन से मेल खाती कोई अच्छी हालत के कपडे मिल जाएँ। हालांकि इसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं होनी चाहिए थी, मगर पता नहीं क्यूँ यह सब देख मुझे थोडा अज़ीब लग रहा था। इतनी बड़ी तादाद में इन पुराने कपड़ों को खरीदने और बेचने के लिए लोगों की भीड़। ऐसे कपडे जो हम महीनो और सालो पहन कर छोड़ देते हैं या गृहणियां अक्सर ऐसे कपड़ों को बर्तन बेचने वालों से बदल लेती हैं , उन्ही कपड़ों का एक बहुत ही बड़ा खरीदार वर्ग भी है। मेरे लिए यह नज़ारा एक नए अनुभव से कम नहीं था।
कभी कभी सोचता हूँ सच में भारत की आधी जनसँख्या ऐसे लोगों की ही है जिनकी तंग गलियों व उनके जीवन शैली से हमें कभी वास्ता नहीं पड़ता। काश हमारे निति निर्धारक, भारतवर्ष के भाग्यविधाता हमारे सरकार में बैठे लोग ईमानदार होते तो आज आजादी के लगभग सात दशकों के बाद भी हमारे देश की यह स्थिति कभी न होती। करीब ७ साल बाद मुझे मेरे एक पूर्व शिक्षक ने फेसबुक पर बताया कि वे अब सिंगापुर में सेटल हो गए हैं। उन्होंने बताया सिंगापुर बहुत ही अच्छा देश है। उन्हें वहाँ की नागरिकता मिल गयी है और वे वहाँ सपरिवार काफी हसीं ख़ुशी से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि वहाँ सार्वजनिक जीवन में कोई करप्शन नहीं है। वहाँ इनकम टैक्स भी नहीं देना होता। और वहाँ विधि व्यवस्था बहुत अच्छी है। यह सब सुनकर अपने देश की स्थिति की सिंगापुर से तुलना करने पर बहुत शर्म महसूस हो रहा था।
--------------------------------------------------------------------
मित्रों यदि मेरा यह पोस्ट आपके दिल को जरा भी छू कर गुजरा हो तो मुझे विश्वास है कि आप मेरे इस प्रयास को लाइक दे कर मुझे और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा, स्नेह और आशीर्वाद देंगे। आप अगर मुझे मेरे फेसबुक प्रोफाइल पर फॉलो करते हैं तो आपको मेरे शेयर किये सारे पोस्ट्स आपके नोटिफिकेशन्स में मिलते रहेंगे।
कभी कभी सोचता हूँ सच में भारत की आधी जनसँख्या ऐसे लोगों की ही है जिनकी तंग गलियों व उनके जीवन शैली से हमें कभी वास्ता नहीं पड़ता। काश हमारे निति निर्धारक, भारतवर्ष के भाग्यविधाता हमारे सरकार में बैठे लोग ईमानदार होते तो आज आजादी के लगभग सात दशकों के बाद भी हमारे देश की यह स्थिति कभी न होती। करीब ७ साल बाद मुझे मेरे एक पूर्व शिक्षक ने फेसबुक पर बताया कि वे अब सिंगापुर में सेटल हो गए हैं। उन्होंने बताया सिंगापुर बहुत ही अच्छा देश है। उन्हें वहाँ की नागरिकता मिल गयी है और वे वहाँ सपरिवार काफी हसीं ख़ुशी से रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि वहाँ सार्वजनिक जीवन में कोई करप्शन नहीं है। वहाँ इनकम टैक्स भी नहीं देना होता। और वहाँ विधि व्यवस्था बहुत अच्छी है। यह सब सुनकर अपने देश की स्थिति की सिंगापुर से तुलना करने पर बहुत शर्म महसूस हो रहा था।
--------------------------------------------------------------------
मित्रों यदि मेरा यह पोस्ट आपके दिल को जरा भी छू कर गुजरा हो तो मुझे विश्वास है कि आप मेरे इस प्रयास को लाइक दे कर मुझे और भी अच्छा लिखने की प्रेरणा, स्नेह और आशीर्वाद देंगे। आप अगर मुझे मेरे फेसबुक प्रोफाइल पर फॉलो करते हैं तो आपको मेरे शेयर किये सारे पोस्ट्स आपके नोटिफिकेशन्स में मिलते रहेंगे।
No comments:
Post a Comment