Saturday, March 1, 2014

अपने सर्किल में आने वाले अशालीन एवं अननुशाशित लोगों से कैसे निपटें ?

मित्रों, आप सबने ऐसा कई बार महसूस किया होगा की आपके सर्किल में चाहे अनचाहे कुछ ऐसे लोग आ जाते होंगे, जिनकी उपस्थिति आपको विचलित करती होगी।   मैंने कई बार देखा है ऐसे लोग जो बात-चित या किसी सार्थक मुद्दे पर बहस के समय अपना आपा न सिर्फ खो देते हैं, बल्कि नैतिकता और शालीनता की सारी हदें भी तोड़ देते हैं।   ऐसे लोगों में घमंड इतना ज्यादा होता है कि वे अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझते।  ऐसे लोग चाहे छोटे पदों में कार्यरत हों, किन्तु अपने ही ऑफिस के बड़े बड़े अफसरों को गालिया देने में, अपने सहकर्मियों को गाली सूचक शब्दों से सम्बोंधित करने से नहीं चूकते।   हालांकि ऐसे लोगों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इससे उनके बारे में दूसरों की नजर में क्या इमेज बनती है।   ऐसे लोग बड़बोले होते हैं और अपनी  डींगे हांकना भी उन्हें काफी पसंद होता है।   मगर समस्या यह होती है कि वे किसी सार्थक बहस का हिस्सा नहीं बन सकते।   उनके पास ना तो धैर्य होता है किसी के बात को सुनने की ना, इतनी समझ होती है कि वे दूसरे की बातों को समझ सकें।  दूसरे शब्दों में इनमे बौद्धिक क्षमता का नितांत अभाव पाया जाता है।   जब भी ऐसे लोग अपना मुँह खोलते हैं, आपको पता चल जाता है कि उनके पास बोलने को कुछ नहीं है, तथ्यों की कोई जानकारी नहीं है और बस बेतुकी बातें बोलते चले जाना उनका शौक होता है।   ऐसे लोगों का प्रयास यह होता है कि वे दूसरों को अपने स्तर तक गिराना चाहते हैं जहाँ ला कर वे दूसरों को हरा सकें।   वैसे तो हम सब का ऐसे लोगों से आमना - सामना होना एक सामान्य सी बात है, ऐसे लोगों से कैसे बचना चाहिए यह बहुत जरूरी है।

कल ऐसे ही एक सहकर्मी से मेरा अनजाने में आमना सामना हो गया।   यह महानुभाव अपने आप को एक्स सर्विस मैन कहते हैं, मगर इनकी बातों को सुन कर पहले तो मैं उसकी बौद्धिक क्षमता की कमी पर उसके साथ सहानुभूति के साथ पेश आता था।   कभी कभी यह मेरे सर्विस डेस्क पर आ कर मेरा दिमाग भी खाने का काम किया करते थे।  मेरे न चाहने पर भी दूसरों की बुराई और अपनी डींगे हाकने में लगे रहते थे, मगर यह वह समय था जब वे जनाब एक साल पहले नए नए हमारी कंपनी में आये थे और तब इनके बारे में मुझे बहुत कुछ मालूम न था।   कुछ दिनों पूर्व इनके बारे में पता चला कि इन्होने अपने साथ के ही किसी सहकर्मी के साथ हाथा-बाही की, उसके बाद इनके खिलाफ कंपनी के अधिकारियों के समक्ष शिकायत हो गयी।   फिर इस घटना के कुछ दिनों बाद ये जनाब मेरे पास अपनी कहानी सुनाने आये।  अपनी डींगे हाक्ने लगे कि जिसको इन्होने पीटा, उसको बार बार पीटेंगे।  ऐसे बता रहे थे जैसे कोई जंग जीत कर आये हों।   इस कम अक्ल इंसान की उम्र करीब ३५ वर्ष है, मुझे आश्चर्य इस बात का हुआ कि एक एक्स सर्विस मैन इस तरह अननुशाशित कैसे हो सकता है।   ऐसे लोग किसी भी आर्गेनाईजेशन के लिए कलंक हैं।  कल मुझे अपशब्द बोलते हुए इन्होने सारी हदें पार कर ली, इन्हे यह बोध भी नहीं रहा की, मैं इस कंपनी में इनसे काफी पुराना हूँ।  खैर इस बात से मुझे इस लिए ज्यादा फर्क नहीं पड़ता क्यूँ कि इन्होने अपने बारे में चार अन्य मित्र जो मेरे साथ थे, ये बड़ी शान से बताया कि वे बहुत घटिया टाइप के हैं और वे किसी भी हद तक गिर सकते हैं।   मुझे संतोष है कि इस बात का विरोध वहाँ मौजूद सभी लोगों ने किया और महसूस किया कि ये जनाब अपने संस्कार एवं पृष्टभूमि के बारे में अपना परिचय दे रहे थे।

मित्रों, वास्तव में मैंने यह आर्टिकल इस लिए लिखा है कि आप सब ऐसे लोगों के संपर्क में जरूर आते होंगे।   ऐसे लोगों से कैसे निपटा जाए इसके बारे में सोचना चाहिए।   मेरे साथ यह पहला अनुभव नहीं है, ऐसे लोगों से मैंने कई बार निपटा है।   और यही आपको बताना चाहता हूँ, ऐसे लोगों को आप कभी महत्व न दें।  इनके उपस्थिति में अगर सम्भव हो तो आप वहाँ से पलायन कर लें या यदि वहाँ उपस्थित रहना नितांत जरुरी हो तो उनके साथ किसी परिचर्चा में भाग न लें।   ऐसे लोगों को अपनी इज्जत की तो कोई परवाह नहीं होती, मगर दूसरों की इज्जत उछालने में इन्हे आनंद की अनुभूति होती है।
धन्यवाद।

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