मोदी जी के प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता तक पहुचने के साथ ही अधिकाँश विपक्षी दलों के इस चुनाव में सफाये के बीच इन पार्टियों की अपने वजूद को बचाने की भारी जद्दोजहद चल रही है। बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) के विधायकों के बीच इस हार के बाद भारी असंतोष की खबरें आ रही हैं। यही नहीं इस हार की प्रमुख वजह नितीश जी का अच्छी भली विकास के पथ पर चल रही बिहार की भाजपा के साथ गठबंधन सरकार को तोड़ देना माना जा रहा है क्यूंकि इस तरह इन्होने बिहार में एक बड़े जनाधार को खो दिया। बहरहाल नितीश जी ने हार की जिम्मेवारी लेते हुए मंत्रिमंडल सहित अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने विधानसभा भंग करने की शिफारिश नहीं की है। खबर ये भी है की नितीश जी एवं उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव के बीच भारी मतभेद उभर आएं हैं। हालत यह है की शरद जी ने बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) एवं नितीश जी के घूर विरोधी लालू यादव जी के राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिल कर गठबंधन सरकार बनाने के संकेत दिए हैं। यह संकेत बिहार की राजनीति में अप्रत्याशित माना जा रहा है क्यूंकि बिहार में नितीश कुमार की अगवाई में लालू जी के भ्रष्टाचार एवं कुशाशन के खिलाफ ही जनता दल (यूनाइटेड) एवं भाजपा गठबंधन को वहां की जनता ने प्रचंड बहुमत के साथ पिछले दो बार बिहार की सत्ता तक पहुचाया था। खैर राजनीति में कुछ भी संभव है।
दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश से भी खबरें आ रही हैं की वहां भी घोर विरोधी पार्टियां मुलायम सिंह की सपा एवं मायावती की बसपा इन चुनावों में भयंकर हार के बाद गठबंधन के संकेत दे रही हैं। वहीं दिल्ली राज्य की सरकार से तथाकथित लोकपाल विधयक के पास न होने देने के कांग्रेस व भाजपा के रवैये के वजह से मंत्रिमंडल सहित केजरीवाल के इस्तीफा दे कर आम चुनावों की तैयारी में जोर शोर से लगने के बावजूद भारी हार एवं दिल्ली की सात की सात लोक सभा सीटों पर पराजय के बाद केजरीवाल जी की पार्टी फिर से दिल्ली राज्य की सत्ता में वापस सरकार बनाने की जद्दोजहद में जुड़ गयी है। दिल्ली में लोक सभा चुनाओ में भारी हार के बाद विधायकों में दहशत का माहौल बताया जा रहा है। आशंका है कि अगली बार अगर विधान सभा चुनाव हुए तो शायद वापस आम आदमी पार्टी अपना पुराना प्रदर्शन न दुहरा पाये।
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